1. सूक्ष्मजीवों का परिचय
· सूक्ष्मजीव ऐसे सूक्ष्म जीव होते हैं जिन्हें नंगी आँखों से नहीं देखा जा सकता।
· इनमें बैक्टीरिया, फफूंद, प्रोटोजोआ, शैवाल, और विषाणु शामिल हैं।
2. सूक्ष्मजीवों के प्रकार
बैक्टीरिया (Bacteria):
o ये एकल-कोशिकीय सूक्ष्मजीव हैं।
o विभिन्न आकारों और आकृतियों में पाए जाते हैं, जैसे गोल (कोकस), छड़ी के आकार का (बेसिलस), और सर्पिल (स्पाइरिलम)।
o ये अपना भोजन स्वयं बना सकते हैं या अन्य जीवों पर निर्भर होते हैं।
फफूंद (Fungi):
o ये जीवों के समूह में आते हैं जो न तो पशु होते हैं और न ही पौधे।
o फफूंद में कवक (Mushroom) और खमीर (Yeast) शामिल हैं।
o फफूंद मृत और सजीव पदार्थों पर निर्भर करते हैं और अपघटन का कार्य करते हैं।
प्रोटोजोआ (Protozoa):
o ये एकल-कोशिकीय जीव होते हैं।
o इनके उदाहरण हैं - अमीबा, पैरामीशियम, प्लाज्मोडियम।
o ये अपने शरीर को आकार बदलकर या कशाभ (Flagella) की मदद से चलते हैं।
शैवाल (Algae):
o ये हरे रंग के जीव होते हैं जिनमें प्रकाश संश्लेषण की क्षमता होती है।
o इनका मुख्य उदाहरण है स्पाइरोगाइरा।
o ये पानी में पाए जाते हैं और ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं।
विषाणु (Viruses):
o ये जीवित और निर्जीव के बीच का जीव है।
o ये केवल अन्य जीवों की कोशिकाओं के भीतर ही सक्रिय रहते हैं।
o इनका उदाहरण है इन्फ्लुएंजा वायरस, एचआईवी।
3. सूक्ष्मजीवों की विशेषताएँ
· सूक्ष्मजीव हर प्रकार के पर्यावरण में पाए जाते हैं, जैसे - जल, मृदा, वायु।
· इनमें से कुछ सूक्ष्मजीव हानिकारक होते हैं, जबकि कुछ लाभदायक भी होते हैं।
· सूक्ष्मजीवों का उपयोग दवाइयों, खाद्य पदार्थों, और जैविक अपघटन में होता है।
4. सूक्ष्मजीवों का उपयोग
खाद्य पदार्थों में:
o खमीर का उपयोग ब्रेड और केक बनाने में किया जाता है।
o लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया का उपयोग दूध से दही बनाने में किया जाता है।
औषधियों में:
o पेनिसिलिन जैसी एंटीबायोटिक दवाओं का निर्माण सूक्ष्मजीवों से किया जाता है।
o बैक्टीरिया और फफूंद विभिन्न प्रकार की एंटीबायोटिक दवाओं के स्रोत होते हैं।
कृषि में:
o कुछ बैक्टीरिया नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक होते हैं, जैसे - राइजोबियम।
o ये मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं और पौधों की वृद्धि में सहायक होते हैं।
अपशिष्ट प्रबंधन में:
o सूक्ष्मजीव जैविक अपघटन में सहायक होते हैं और कचरे को कंपोस्ट में बदलने का कार्य करते हैं।
o ये पर्यावरण को साफ रखने में मदद करते हैं।
5. सूक्ष्मजीवों से होने वाले रोग
मानव रोग:
o टाइफाइड: सैल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होता है।
o हैजा (Cholera): विब्रियो कॉलेरी बैक्टीरिया से होता है।
o मलेरिया: प्लाज्मोडियम प्रोटोजोआ से होता है जो मादा एनोफिलीज मच्छर द्वारा फैलता है।
o एड्स (AIDS): एचआईवी वायरस द्वारा होता है।
पौधों के रोग:
o रस्ट ऑफ व्हीट: एक फफूंद जनित रोग।
o सिट्रस कैंकर: यह एक बैक्टीरियल रोग है जो नींबू वर्गीय पौधों पर होता है।
पशुओं के रोग:
o एंथ्रेक्स: बैसिलस एंथ्रासिस बैक्टीरिया से होता है।
o फूट एंड माउथ डिजीज: एक वायरस से होता है जो गाय, भैंस, और बकरियों में होता है।
6. सूक्ष्मजीवों से सुरक्षा
· स्वच्छता का पालन: साफ-सफाई से सूक्ष्मजीवों के संक्रमण से बचा जा सकता है।
· टीकाकरण: कई रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण एक प्रभावी उपाय है।
· संक्रमण से बचाव: भोजन को अच्छी तरह से पकाकर और स्वच्छ पानी का उपयोग कर सकते हैं।
7. सूक्ष्मजीव और पर्यावरण
· सूक्ष्मजीव जैविक चक्र में सहायक होते हैं और विभिन्न तत्वों को पुनःचक्रित करते हैं।
· ये मृत कार्बनिक पदार्थों को अपघटित करके मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हैं।
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